
बचपन में, क्या आपने कभी सोचा है कि "सूर्य बिना तेल या इंजन के लगातार कैसे जलता रहता है?"
हमें स्कूल में पढ़ाया गया था कि सूर्य "गैस का एक विशाल गोला" (Giant ball of gas) है। इससे मन में सवाल आते हैं कि "अगर यह गैस है, तो यह गोल क्यों है?" या "क्या यह कभी आग की तरह बुझ जाएगा?"
सूर्य हमसे लगभग 15 करोड़ कि.मी. दूर चमक रहा है और पृथ्वी पर जीवन का मुख्य स्रोत है। सुबह की पहली किरण से लेकर खेतों में फसल पकाने वाली गर्मी तक, सब कुछ इसी तारे से शुरू होता है।
लेकिन, यह कहना कि सूर्य "जल रहा है" (burning) पूरी तरह सही नहीं है। लकड़ी की आग की तरह इसे जलने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती। सूर्य अपने क्रोड (Core) में नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के द्वारा ऊर्जा पैदा करता है। यह परमाणु स्तर पर होने वाली एक प्रक्रिया है जो आग से बिल्कुल अलग है।
इस लेख में, हम सूर्य के बेहद गर्म क्रोड से लेकर बाहरी कोरोना तक की संरचना को समझेंगे। साथ ही हम ISRO के आदित्य-L1 (Aditya-L1) मिशन के संदर्भ में भी बात करेंगे।

सूर्य के बारे में मुख्य तथ्य (Key Facts)
| श्रेणी | मान | पृथ्वी से तुलना |
|---|---|---|
| व्यास (Diameter) | ~14 लाख कि.मी. | पृथ्वी से ~109 गुना बड़ा |
| द्रव्यमान (Mass) | ~1.989 × 10³⁰ kg | पृथ्वी से ~3.3 लाख गुना भारी |
| आयतन (Volume) | ~1.41 × 10¹⁸ km³ | इसमें ~13 लाख पृथ्वीयां समा सकती हैं |
| पृथ्वी से दूरी | ~15 करोड़ कि.मी. (1 AU) |
प्रकाश की गति से 8 मिनट 19 सेकंड |
| सतह का तापमान | ~5,500°C | लावा से ~5 गुना ज्यादा गर्म |
| क्रोड का तापमान | ~1.5 करोड़ °C | सतह से 2,700 गुना ज्यादा गर्म |
| आयु (Age) | ~4.6 अरब साल | मध्य-आयु का तारा |
स्रोत: NASA Sun Fact Sheet
1. सूर्य की आंतरिक संरचना (Internal Structure)
अगर हम सूर्य को बीच से काट सकें, तो हमें क्या दिखेगा?
इसका आंतरिक भाग तीन मुख्य परतों में बंटा है: क्रोड (Core), विकिरण क्षेत्र (Radiative Zone), और संवहन क्षेत्र (Convective Zone)। जैसे अंडे में जर्दी और सफेदी होती है, वैसे ही सूर्य की हर परत का अलग काम है।

1-1. क्रोड (Core): ऊर्जा का पावरहाउस
क्रोड सूर्य की त्रिज्या का केवल 20-25% हिस्सा है, लेकिन यही वो जगह है जहां सारी ऊर्जा पैदा होती है।
यहां का तापमान लगभग 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस है। इस अत्यधिक गर्मी और दबाव में, पदार्थ "प्लाज्मा" (Plasma) अवस्था में होता है। यहां हाइड्रोजन के परमाणु आपस में टकराकर हीलियम बनाते हैं। इसे नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहते हैं।
जब चार हाइड्रोजन परमाणु मिलकर एक हीलियम बनाते हैं, तो थोड़ा सा द्रव्यमान गायब हो जाता है। आइंस्टीन के सिद्धांत E=mc² के अनुसार, यही द्रव्यमान ऊर्जा में बदल जाता है।
सूर्य हर सेकंड 60 करोड़ टन हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है। इससे इतनी ऊर्जा निकलती है कि सूर्य अगले 5 अरब सालों तक बिना रुके चमक सकता है।
1-2. विकिरण क्षेत्र (Radiative Zone)
क्रोड में बनी ऊर्जा तुरंत बाहर नहीं आती। उसे पहले "विकिरण क्षेत्र" से गुजरना पड़ता है।
यहां प्लाज्मा इतना घना होता है कि प्रकाश के कण (फोटॉन) सीधे नहीं चल सकते। वे बार-बार टकराते हैं और रास्ता बदलते हैं। इस टेढ़े-मेढ़े (Zig-zag) रास्ते के कारण, एक फोटॉन को क्रोड से सतह तक आने में लगभग 1 लाख 70 हजार साल लग जाते हैं।
जो धूप आज आपके चेहरे पर पड़ रही है, वो दरअसल इंसानी सभ्यता शुरू होने से भी पहले सूर्य के केंद्र में बनी थी।
1-3. संवहन क्षेत्र (Convective Zone)
सूर्य का बाहरी 30% हिस्सा "संवहन क्षेत्र" कहलाता है। यहां ऊर्जा चलने का तरीका बदल जाता है।
जैसे गैस पर रखा दूध या दाल उबलती है, वैसा ही कुछ यहां होता है। गर्म प्लाज्मा ऊपर उठता है, सतह पर गर्मी छोड़ता है, और ठंडा होकर वापस नीचे जाता है।
इस हलचल से सतह पर दाने (granules) बनते हैं। हर एक दाना लगभग 1,000 कि.मी. चौड़ा होता है—यानी राजस्थान राज्य या दिल्ली से मुंबई की दूरी जितना बड़ा। सूर्य की सतह हमेशा उबलती रहती है।
| परत (Layer) | त्रिज्या % | तापमान | ऊर्जा का माध्यम |
|---|---|---|---|
| क्रोड (Core) | 0-25% | ~1.5 करोड़ °C | नाभिकीय संलयन |
| विकिरण क्षेत्र | 25-70% | ~70 लाख से 20 लाख °C | विकिरण (फोटॉन) |
| संवहन क्षेत्र | 70-100% | ~20 लाख से 5,500 °C | संवहन (उबलता प्लाज्मा) |
2. सूर्य का वायुमंडल (Solar Atmosphere)
सूर्य के मुख्य शरीर के बाहर उसका वायुमंडल है, जो तीन हिस्सों में बंटा है: फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर, और कोरोना।
2-1. प्रकाशमंडल (Photosphere)
जब हम सूर्य को देखते हैं (कभी सीधा न देखें!), तो हम प्रकाशमंडल को देख रहे होते हैं। यह सूर्य की वह सतह है जो दिखाई देती है।
इसका तापमान लगभग 5,500°C होता है। यहां सबसे प्रसिद्ध चीज है सौर कलंक (Sunspots)। यह काले धब्बे होते हैं जो आस-पास की जगह से ठंडे (~4,000°C) होते हैं, इसलिए काले दिखते हैं।

2-2. वर्णमंडल (Chromosphere)
प्रकाशमंडल के ठीक ऊपर वर्णमंडल होता है। यह आमतौर पर दिखाई नहीं देता, लेकिन पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान एक लाल रंग की रिंग के रूप में दिखता है।
अजीब बात यह है कि यहां तापमान सतह से दूर जाने पर बढ़ता है और 20,000°C तक पहुंच जाता है।
2-3. कोरोना (Corona - किरीट)
सबसे बाहरी परत है कोरोना (इसका मतलब है "ताज" या Crown)। यह लाखों किलोमीटर तक फैला हुआ है।
कोरोना एक वैज्ञानिक रहस्य है: इसका तापमान 10 लाख से 30 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। सतह से दूर जाने पर गर्मी क्यों बढ़ती है? यह ऐसा है जैसे आग से दूर जाने पर ठंड की जगह गर्मी लगने लगे।
भारत का आदित्य-L1 (Aditya-L1) मिशन और नासा का पार्कर सोलर प्रोब इसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
3. सौर गतिविधि (Solar Activity)
सूर्य कोई शांत गोला नहीं है। वहां हमेशा तूफान चलते रहते हैं।
3-1. सनस्पॉट और 11 साल का चक्र
सनस्पॉट की संख्या हर 11 साल में घटती और बढ़ती रहती है। इसे सौर चक्र (Solar Cycle) कहते हैं।
"सोलर मैक्सिमम" के दौरान सनस्पॉट बहुत ज्यादा होते हैं और "सोलर मिनिमम" में बहुत कम। यह सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) के कारण होता है।
3-2. सौर ज्वाला (Solar Flares)
कभी-कभी सनस्पॉट के पास छिपी ऊर्जा धमाके के साथ बाहर निकलती है। इसे सौर ज्वाला (Solar Flare) कहते हैं। इस एक धमाके में करोड़ों हाइड्रोजन बम जितनी ताकत होती है।
3-3. सौर वायु और अरोरा
सूर्य लगातार आवेशित कणों (charged particles) की धारा छोड़ता है जिसे सौर वायु (Solar Wind) कहते हैं। जब यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है, तो ध्रुवों पर हरी और लाल रोशनी दिखती है जिसे अरोरा (Aurora) कहते हैं।
▶ संबंधित लेख: सोलर फ्लेयर क्या है? इसका पृथ्वी पर क्या असर होता है?
4. सूर्य का जीवन चक्र (Lifecycle)
हर तारे की तरह, सूर्य का भी जन्म हुआ था और अंत भी होगा।
4-1. जन्म से अब तक
लगभग 4.6 अरब साल पहले, धूल और गैस के बादल से सूर्य बना। अभी यह अपनी उम्र के मध्य पड़ाव (Main Sequence) में है और स्थिर रूप से हाइड्रोजन को जला रहा है।
4-2. लाल दानव (Red Giant) चरण
लगभग 5 अरब साल बाद, क्रोड में हाइड्रोजन खत्म हो जाएगा। सूर्य फूलना शुरू करेगा और एक लाल दानव (Red Giant) बन जाएगा।
यह इतना बड़ा हो जाएगा कि बुध (Mercury) और शुक्र (Venus) ग्रह को निगल लेगा। पृथ्वी भी इसकी गर्मी से जल कर राख हो जाएगी।

4-3. अंत: श्वेत वामन (White Dwarf)
लाल दानव बनने के बाद, सूर्य अपनी बाहरी परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देगा, जिससे एक सुंदर प्लैनेटरी नेबुला बनेगा।
अंत में जो बचेगा वो होगा एक छोटा, बेहद घना (dense) तारा जिसे श्वेत वामन (White Dwarf) कहते हैं। यह पृथ्वी के बराबर होगा लेकिन इसका वजन बहुत ज्यादा होगा। सूर्य कभी "विस्फोट" नहीं करेगा, वो बस धीरे-धीरे ठंडा होकर बुझ जाएगा।
5. आम गलतफहमियां (Common Myths)
5-1. "सूर्य आग से जल रहा है"
अंतरिक्ष में ऑक्सीजन नहीं है, इसलिए वहां आग नहीं लग सकती। सूर्य नाभिकीय संलयन की वजह से चमकता है, जो रासायनिक आग से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है।
5-2. "सूर्य पीला है"
अगर आप अंतरिक्ष से सूर्य को देखेंगे, तो वो सफेद (White) दिखेगा। पृथ्वी के वायुमंडल के कारण हमें नीला रंग कम दिखता है और पीला/लाल ज्यादा, इसलिए वो पीला नजर आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक आने में कितना समय लगता है?
A: लगभग 8 मिनट और 19 सेकंड। प्रकाश की गति 3 लाख कि.मी./सेकंड है। लेकिन क्रोड से सतह तक आने में ऊर्जा को 1.7 लाख साल लग जाते हैं।
Q: अगर सूर्य गायब हो जाए तो क्या होगा?
A: 8 मिनट तक हमें पता नहीं चलेगा। उसके बाद पृथ्वी अंधेरे में डूब जाएगी और अपने ऑर्बिट से निकल कर अंतरिक्ष में ठंडी होने लगेगी।
Q: क्या सूर्य को चश्मे से देखना सुरक्षित है?
A: बिल्कुल नहीं! साधारण धूप के चश्मे (sunglasses) आंखों को नहीं बचा सकते। सूर्य को सीधा देखने से आंखें खराब हो सकती हैं। हमेशा ISO-certified सोलर फिल्टर का ही उपयोग करें।
संदर्भ (References)
- ISRO Aditya-L1 Mission: https://www.isro.gov.in/
- NASA Sun Fact Sheet: https://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/sunfact.html
- Stanford Solar Center: http://solar-center.stanford.edu/
